जबलपुर एसटीएफ ने ग्राहक बनकर पैंगोलिन तस्करों को पकड़ा

बालाघाट/वारासिवनी। जबलपुर एसटीएफ की टीम ने ग्राहक बनकर वारासिवनी वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मंगेझरी से गुरुवार की रात में पैंगोलिन के चार तस्करों को पकड़ा हैं।आरोपितों से पैंगोलिन खरीदने के लिए सात लाख 50 हजार रुपये में सौदा तय किया गया था।जिन्हें हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर एसटीएफ टीम को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम मंगेझरी में एक युवक पैंगोलिन को बेचने की फिराक में घूम रहा है।जिसके बाद एसटीएफ ने वारासिवनी पहुंचकर वन अमले की मदद से उच्चाधिकारियों के निर्देश पर टीम गठित की।जहां मौके पर पहुंची टीम ने आरोपित यशलाल पिता हुकुमचंद कटरे 37 वर्ष निवासी मंगेझरी, राजेश पिता बाबूलाल मर्सकोले 41 निवासी मंगेझरी, अनतराम पिता रामदास बहेटवार 35 वर्ष निवासी छोटी कुम्हारी बालाघाट, दिव्याशु पिता उदेलाल झरिया 30 वर्ष निवासी सरेखा बालाघाट को गिरफ्तार किया गया।जिनके पास से पैंगोलिन को बरामद किया है।
तीन दिन से आरोपितों के संपर्क में थी टीम:
बताया जा रहा है कि एसटीएफ की टीम बीते तीन दिनों से वारासिवनी पहुंचकर आरोपितों को पैंगोलिन सहित पकड़ने के लिए उनसे संपर्क में थी और ग्राहक बनकर पतासाजी कर रही थी।एसटीएफ का आरोपितों के साथ लगभग सात लाख 50 हजार रुपये में दूरभाष पर सौदा तया हुआ था।तब आरोपितों ने उन्हें मिलने का स्थान बताया और आरोपित उस जगह पर जैसे ही पैंगोलिन को साथ में लेकर पहुंचे।तभी जबलपुर एसटीएफ की टीम व वारासिवनी वन अमले की टीम ने घेराबंदी करके पकड़ लिया।इस पैंगोलिन की कीमत लाखों रुपये में बताई जा रही है।
शिकार के आ रहे मामले सामने:
पिछले कुछ माह से वारासिवनी वन परिक्षेत्र अंतर्गत शिकारियों द्वारा बाघ, हिरण, जंगली सूअर, चीतल के लगातार शिकार करने के मामले सामने आ रहे है।गुरुवार की रात्रि मंगेझरी में कुछ आरोपितों द्वारा पैंगोलिन को बेचने में घूम रहे थे।लेकिन वारासिवनी वन अमले की टीम को खबर तक नहीं लगी।लेकिन इसकी मुखबिर द्वारा सूचना जबलपुर एसटीएफ की टीम को दी गई।उसके बाद जबलपुर से वारासिवनी पहुंची और एसटीएफ की टीम ने वारासिवनी वन अमले की मदद से चारों ही आरोपितों को पकड़ लिया। इस कार्रवाई में पैंगोलिन के साथ आरोपितों को पकड़ने में भवानी बिसेन वनरक्षक, रविंद्र लड़कर, लोकेश टेंभरे, शैलेंद्र जगजीवन, दीपेंद्र सिंह परमार, सुनील मड़ावी, ताराचंद डोंगरे, महेश बिसेन, विनय भवरे, उमेश शुक्ला,राजेंद्र बिसेन सहित स्टाफ का योगदान रहा।


