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मध्यप्रदेश

बढ़े सदस्यता शुल्क पर भड़के व्यापारी दीवाली-होली मिलन नहीं तो खर्च कहां

इंदौर। शहर के दूसरे सबसे धनी व्यापारिक संगठन इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन (इल्वा) में सदस्यों ने बढ़े हुए सदस्यता शुल्क के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संस्था ने वार्षिक शुल्क ढाई गुना कर दिया है। संस्था ने नोटिस निकालकर लोहा व्यापारियों को शुल्क जमा करने का निर्देश दिया है। बिना सदस्यों की सहमति के शुल्क बढ़ाने पर सदस्यों ने आपत्ति लेते हुए संस्था के जिम्मेदारों से सवाल पूछ लिया है कि तीन वर्ष से संस्था में न दीवाली मिलन हुआ, न होली मिलन। सदस्यों पर खर्च किया नहीं जा रहा, न चुनाव हो रहे हैं। ऐसे में बिना सहमति शुल्क बढ़ा कैसे दिया?

5 अप्रैल को संस्था के अध्यक्ष अमीर इंजीनयरवाला और मंत्री नंदकिशोर पंचोली ने शुल्क जमा करने के लिए बाजार में नोटिस जारी किया। इसके जरिए निर्देश दिया कि 30 अप्रैल तक वार्षिक सदस्यता शुल्क जमा करवा दें। शुल्क नहीं चुकाने पर संस्था के सदस्यों की सदस्यता समाप्त की जा सकती है। साथ ही शुल्क वसूली के लिए संस्था ने अब कुछ लोगों को दुकान-दुकान भेजना भी शुरू कर दिया है। दरअसल संस्था का सदस्यता शुल्क 3 साल पहले तक 500 रुपये वार्षिक था।

तीन साल पहले इसे बढ़ाकर 1000 रुपये किया गया। अब इस राशि को भी बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया गया है। दरअसल इल्वा के पास खासी संपत्ति है। संस्था के स्कूल-कालेज संचालित हो रहे हैं। तौल कांटे हैं और दुकानें भी हैं। इन सबसे किराया अर्जित होता है। अच्छी खासी आय होने के बाद भी संस्था ने शुल्क बढ़ाया तो सदस्यों ने आपत्ति लेते हुए कहा कि पहले संस्था के जिम्मेदार हिसाब दें।

तीन वर्षों से न साधारण सभा हुई, न चुनाव हुए, न कोई समारोह तो ऐसे में पैसा खर्च कहां हो रहा है? सदस्यों पर आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है? कुछ सदस्यों ने कहा है कि संस्था के नए विधान के खिलाफ कोर्ट में प्रकरण लंबित है। ऐसे में शुल्क का बदलाव कैसे लागू हो सकता है? इल्वा के वरिष्ठ सदस्य मनोज शर्मा ने कहा है कि असल में नियमानुसार संस्था शुल्क को विधान में उल्लेखित करती है और उसे रजिस्ट्रार फर्म्स एंड सोसायटी से पास करवाती है। फर्म्स एंड सोसायटी में तो 500 रुपये शुल्क दर्ज है। अब तक 1000 ले रहे थे और अब ढाई हजार मांगे जा रहे हैं।

जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी

शुल्क का बोझ बढ़ने के बाद इल्वा के तमाम सदस्यों ने संस्था के वाट्सएप ग्रुपों पर आपत्ति दर्ज कराई। सदस्य व्यापारी उषा पवन गोयल ने लिखित आपत्ति लगाते हुए बढ़े शुल्क वसूली को नियम विरुद्ध करार दे दिया। साथ ही नियमानुसार चुनाव कर नए पदाधिकारी चुनने की मांग भी रख दी। मामला बढ़ता देख पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। बिना चुनाव पद पर बने रहने का आरोप झेल रहे इल्वा के अध्यक्ष अमीर इंजीनिरवाला ने नईदुनिया से बात करते हुए मामले पर बोलने से इन्कार कर दिया। मंत्री नंदकिशोर पंचोली और उपाध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने भी चुप्पी साध ली।

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