ब्रेकिंग
बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम अब होगा ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’, ईसी से प्रस्ताव मंजूर सुशासन तिहार शिविर...78 आवेदनों का मौके पर ही निपटारा:मंदिर हसौद में राशन कार्ड, आधार और श्रम कार्ड ... लाखों टन दुर्लभ खनिज की संभावना,छत्तीसगढ़ में देश की पहली ‘निकल-कॉपर’ खदान में 1.3 किमी तक भंडार मिल... सीएम मोहन यादव ने जानकारी दी, एमपी में यूसीसी जल्द लागू होगी l प्रधानमंत्री मोदी जी के सेवा, सुरक्षा और सुशासन के स्वर्णिम 12 साल सुप्रीम कोर्ट सख्त: फैसले लटकाए तो जवाब देना होगा अब फ्री में नहीं चला सकेंगे Facebook, Instagram और व्हाट्सऐप, Meta ने लॉन्च किया रिचार्ज प्लान सुशासन तिहार से सुखराम के चेहरे पर लौटी मुस्कान 5 घरेलु मसाले जो इम्युनिटी बढ़ने में रामबाण से कम नहीं – जानें इस्तेमाल करने का तरीका मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड क्यों महत्वपूर्ण है।
देश

जिन्हें खुद शक्ति की जरूरत उन्हें सौंप रहे बूथ सशक्त करने की जिम्मेदारी

प्रदेश में चुनावी तैयारियों में जुटी भाजपा अपने बूथ, मतदान केंद्र, पन्ना प्रभारी, त्रिदेव जैसी रचनाओं के माध्यम से संगठनात्मक रूप से भले ही खुद को मजबूत स्थिति में देख रही हो लेकिन मैदानी जिम्मेदारी संभालने वाली टीम मैदान में पहुंचकर चकरा रही है। दरअसल भाजपा ने 14 मार्च से बूथ सशक्तीकरण अभियान का दूसरा चरण शुरू किया है और इसमें प्रदेश सरकार के मंत्रियों के साथ ही सांसदों और केंद्र के मंत्रियों को भी मैदान में उतार दिया है। सभी को बूथ पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं से संवाद करना है। नई जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतरे मालवा-निमाड़ क्षेत्र के पांच मंत्रियों को अपने क्षेत्रों का जो फीडबैक मिल रहा है उसने माननीयों की चिंता बढ़ा दी है। कागजों पर मजबूत दिख रही बूथ रचना में सुराख नजर आ रहे हैं। मंत्री असमंजस में हैं कि संगठन को फीडबैक पहले दें या अपने इलाकों में इन ‘गड्डों’ को पाटें।

राजनीति के ‘समर शंखों’ से गूंज रही छोटी अयोध्या

शहर की राजनीति में ‘छोटी अयोध्या’ के नाम से पहचाने जाने वाले क्षेत्र क्रमांक चार में चुनाव से आठ माह पहले ही ‘समर शंख’ गूंजने लगे हैं। भाजपा के दावेदारों को चार नंबर क्षेत्र हमेशा से ही ‘अपार संभावना’ वाला क्षेत्र नजर आता रहा है। दशकों से यहां की राजनीति गौड़ परिवार के ईद-गिर्द ही रही है। लेकिन इस बार छोटी अयोध्या की राजनीति के तीखे तेवरों ने सभी का ध्यान इस ओर खींचा है। क्षेत्र के छोटे-छोटे मुद्दों को जिस तरह से संगठन और इंटरनेट मीडिया पर प्रस्तुत किया जा रहा है उससे आने वाले दिनों में यह राजनीतिक युद्ध और तीखे तेवरों के साथ लड़े जाने की आशंका भी राजनेताओं को नजर आ रही है। पिछले दिनों हुए विवाद के बाद जिस तरह से पिछली पूरी कुंडली के साथ मामला भोपाल और दिल्ली भेजा गया है उसके बाद गौड़ खेमे ने विधानसभा क्षेत्र के बाहर से इन विवादों की पटकथा लिखने वालों की खोजबीन तेज कर दी है।

धर्म की राजनीति या राजनीति का धर्म…

इंदौर ग्रामीण के देपालपुर विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों धर्म की राजनीति हो रही है या राजनीति ही धार्मिक हो गई है यह चर्चा जोरो पर है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों के क्षत्रप एक के बाद एक बड़े धार्मिक आयोजन करते जा रहे हैं। भव्य मंदिर बनवाकर उसकी विराट प्राणप्रतिष्ठा करने से शुरू हुआ यह ‘शंखनाद’ अब तक जारी है। पिछले दिनों कांग्रेस विधायक विशाल पटेल ने सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा करवाई तो भाजपा के पूर्व विधायक मनोज पटेल ने विश्व मंगल अनुष्ठान में सुंदर कांड और हनुमान आराधना का बड़ा आयोजन करवा दिया। इसके अलावा भी कांग्रेस-भाजपा नेताओं की टीम गांव-गांव में मंदिरों में छोटे-छोटे धार्मिक आयोजन करवा ही रही है। लक्ष्य एक ही है इस बार राजनीति की नैया धर्म की पतवार के सहारे ही किनारे लगाना है। फिर चाहे राजनीति को अपना धर्म बदलना पड़े या फिर धर्म की राजनीति का चोला ओढ़ना पड़े। अब देखना यह है कि ये धर्म की राजनीति आशीष किसे देती है।

चक्रव्यूह तैयार… ‘अभिमन्यु’ का हो रहा इंतजार

कांग्रेस की राजनीति में इन दिनों जितनी खींचतान है उससे कार्यकर्ता तो दूर वे वरिष्ठ नेता भी परेशान हैं जिनका शहर की राजनीति में सीधा दखल नहीं है। एक के बाद एक शिकायतों के पुलिंदे वरिष्ठ नेताओं तक पहुंच रहे हैं। ये स्थिति तब है जब चुनाव को अभी आठ माह शेष हैं। राऊ के विधायक और कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी पार्टी राजनीति के कुरुक्षेत्र में तीरों का सामना कर ही रहे हैं। उनकी ओर विपक्ष से ज्यादा अपने पक्ष से तीर आ रहे हैं। उधर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक, तीन और पांच में भी दावेदारों की स्थिति यह है कि दूसरे पक्ष के लिए चक्रव्यूह तैयार कर इंतजार किया जा रहा है कि भीतर प्रवेश करते ही उसे अभिमन्यु बना दिया जाए। तीन-तीन विधायकों की मौजूदगी वाले इंदौर में कांग्रेस की इस स्थिति पर वरिष्ठ नेता भी कुछ नहीं बोल पा रहे हैं।

Related Articles

Back to top button