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मध्यप्रदेश

अगर आपके दफ्तर में कोई करे दुर्व्यवहार आंतरिक समिति में जाकर करें शिकायत

ग्वालियर। देश में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, कहा जाता है कि महिला पूज्यनीय होती है। लेकिन आए दिन आ रहे महिलाओं को साथ शारीरिक और मानसिक प्रताडना के मामलों को देखकर ऐसा नहीं लगता। देश में एक चर्चित घटना भंवरी देवी हत्याकांड राजस्थान राज्य में हुई थी। एक घटना थी जिसमें तत्कालीन राजस्थान सरकार के मंत्री द्वारा अपने कार्यालय में काम करने वाली महिला कार्यकर्ता के साथ ना सिर्फ बलात्कार किया गया बल्कि उसकी दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के आफिस और वर्कप्लेस पर महिलाओं को शारीरिक उत्पीड़न अथवा यौन हिंसा से बचाने और ऐसे मामलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए एक प्रक्रिया निर्धारित की। इसे विशाखा गाइडलाइन के नाम से जाना जाता है।

इसके बाद भारत सरकार ने सभी आफिस, स्कूल, कालेज, अस्पताल, नर्सिंग होम सहित सभी सार्वजनिक कार्यस्थल में महिलाओं के खिलाफ ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए 2013 में सेक्सुअल हेरास्मेंट आफ वुमेन एट वर्कप्लेस एक्ट, 2013 बनाई । ग्वालियर हाइकोर्ट के वकील रविंद्र दीक्षित बताते हैं कि इस कानून के पालन में हर शासकीय या गैर शासकीय कार्यालय, स्कूल और कालेज, अस्पताल नर्सिंग होम, स्थानीय निकाय के कार्यालय , राज्य सरकार के शासकीय कार्यालय या केंद्र सरकार के शासकीय कार्यालय सहित सभी प्रकार के कार्यालयों में एक च्आंतरिक शिकायत समितिज् का गठन करना अनिवार्य होता है। साथ ही एक स्थानीय शिकायत समिति का गठन करना भी जिले के कलेक्टर या उनके द्वारा निर्धारित किए गए अधिकारी द्वारा अनिवार्य है।

क्या होती है आंतरिक शिकायत समिति

इस समिति में अध्यक्ष के तौर पर उस कार्यालय की वरिष्ठ महिला अधिकारी काम करती है। इसके अलावा कम से कम कम से कम 2 सदस्य जिन्हें सामाजिक कार्य में अनुभव हो या आवश्यक कानूनी ज्ञान हो और जो उस कार्यालय में कार्यरत नहीं हो वो शामिल होती हैं । समिति में 1 सदस्य गैर शासकीय से भी लिया जाता है जिसे सामाजिक कार्य करने काअनुभव प्राप्त हो और कानूनी ज्ञान हो। इस पूरी समिति में आधे सदस्य महिला होना अनिवार्य होता है।

महिला कब कर सकती है शिकायत

कोई भी पीड़ित महिला जिसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसके कार्यालय में किसी साथी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा किसी प्रकार का लाभ देने का लालच देकर अथवा महिला कर्मचारी को जानबूझकर परेशान करने की नियत से उसके कार्य में व्यवधान करे, किसी विभागीय जांच आदि से बचाने का लालच देकर उसके साथ यौन शोषण किया जाए , तो वह महिला इस अधिनियम की धारा 9 के तहत अपनी शिकायत स्थानीय आंतरिक शिकायत समिति को कर सकती है। उसकी शिकायत पर समिति को विस्तृत जांच करने का अधिकार होता है। समिति को बहुत विस्तृत अधिकार प्राप्त होते हैं। इन अधिकारों प्रयोग कर समिति किसी भी व्यक्ति को बतौर गवाह बुला सकती है। साथ ही गवाहों से उनके बयान लेने के बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट 3 महीने के भीतर संबंधित जिला अधिकारी को सौंपने के लिए बाध्य होती है।

शिकायतकर्ता पर भी हो सकती है कार्रवाई

यदि समिति जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचती है, शिकायत जानबूझकर किसी निर्दोष कर्मचारी या अधिकारी को फसाने के लिए की गई है और झूठी गवाही दी गई है । तब ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता के विरुद्ध भी और झूठी गवाही देने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई करने का अपना मत जिले की कलेक्टर को दे सकती है। इस कानून की मंशा अनुसार पीड़ित महिला को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण अपनी बात या शिकायत करने के लिए हर संभव मदद एवं उचित माहौल उपलब्ध कराना है । कानून के अंतर्गत पारित किए गए आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता या दोषी व्यक्ति सक्षम न्यायालय में धारा 18 के अंतर्गत आदेश पारित होने के 90 दिवस के भीतर अपील भी कर सकता है।

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