पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (पीएसएससीआईवीई), एनसीईआरटी
भोपाल द्वारा 26 से 30 अक्टूबर तक देशभर में एक साथ 12 क्षमता निर्माण कार्यक्रम

भोपाल। पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (पीएसएससीआईवीई), एनसीईआरटी, भोपाल द्वारा 26 से 30 अक्टूबर तक देशभर में एक साथ 12 क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 1,000 व्यावसायिक शिक्षक एवं प्रशिक्षक सहभागिता कर रहे हैं। इनमें तीन कार्यक्रम पीएसएससीआईवीई परिसर में आयोजित हो रहे हैं, जिनमें मध्यप्रदेश के 100 से अधिक व्यावसायिक शिक्षक एवं प्रशिक्षक परिधान, सौंदर्य एवं कल्याण तथा रिटेल क्षेत्रों में क्षमता निर्माण गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। ये कार्यक्रम ‘समृद्ध मध्यप्रदेश @2047 के लिए केंद्रीय वित्तपोषित संस्थानों का योगदान’ सम्मेलन में घोषित ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ पहल के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 500 व्यावसायिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के संस्थान के संकल्प की दिशा में आयोजित किए जा रहे हैं। उद्घाटन सत्र में भोपाल के तीनों कार्यक्रमों के प्रतिभागियों ने प्रत्यक्ष तथा अन्य नौ कार्यक्रमों के प्रतिभागियों, अधिकारियों एवं समन्वयकों ने ऑनलाइन सहभागिता की। कार्यक्रम का मंच संचालन सह प्राध्यापक डॉ. आशीष सोनी ने किया। ‘एक संस्थान–एक संकल्प’ पहल के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 500 व्यावसायिक शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए आयोजित कार्यक्रमों का समन्वय भी डॉ. सोनी द्वारा किया जा रहा है।
इस दौरान एनसीईआरटी के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा और शिक्षकों का क्षमता निर्माण विद्यार्थियों को प्रासंगिक कौशलों से युक्त करने तथा देश के विकास को गति देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण हैं। उन्होंने देशभर में विभिन्न संस्थानों के सहयोग से आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थानों के बीच समन्वय और सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं उपयोगी बनाया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा–विद्यालयी शिक्षा 2023 के अनुरूप व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कौशल शिक्षा को केवल एक अलग विषय तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसके सिद्धांतों और गतिविधियों को विभिन्न विषयों तथा शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में समाहित करना आवश्यक है। इससे विद्यार्थियों को कौशलों की व्यावहारिक उपयोगिता समझने और उन्हें वास्तविक जीवन में अपनाने का अवसर मिलेगा।
डॉ. सकलानी ने कहा कि शिक्षकों को उद्योगों की आवश्यकताओं, व्यावहारिक कार्यों और तेजी से बदलती तकनीकों की समझ होना आवश्यक है, ताकि वे विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से तैयार कर सकें। उन्होंने परिधान, ऑटोमोटिव, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सौंदर्य एवं कल्याण, पर्यटन एवं आतिथ्य तथा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को विद्यालयी स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा सुदृढ़ करने की महत्त्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने प्रमुख संसाधन व्यक्तियों के क्षमता निर्माण तथा मध्य स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के क्रियान्वयन से जुड़े कार्यक्रमों के महत्त्व को भी रेखांकित किया।
उन्होंने प्रतिभागियों से कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने, व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने, अनुभव साझा करने तथा प्राप्त ज्ञान को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों की सफलता का आकलन शिक्षण-पद्धतियों में सुधार, उद्योगों से बेहतर जुड़ाव, विद्यार्थियों में करियर के प्रति जागरूकता और कौशल विकास के परिणामों से किया जाना चाहिए। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित नई तकनीकों का सावधानीपूर्वक और उपयोगी ढंग से प्रयोग करने पर बल देते हुए कहा कि तकनीक को समझकर उसका लाभकारी उपयोग करना आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने कार्यक्रमों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर भविष्य में क्षमता निर्माण की पहलों को और बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
व्यावसायिक प्रशिक्षक विद्यार्थियों को कौशल और रोजगार की दिशा दें : डॉ. पालीवाल
पीएसएससीआईवीई के संयुक्त निदेशक डॉ. दीपक पालीवाल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए शिक्षकों एवं प्रशिक्षकों का क्षमता निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रशिक्षकों को उद्योगों की आवश्यकताओं, आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक प्रशिक्षण पद्धतियों से परिचित कराना है। उन्होंने प्रशिक्षकों से स्थानीय उद्योगों, कौशल केंद्रों, कृषि विज्ञान केंद्रों, विश्वविद्यालयों, होटल प्रबंधन संस्थानों और अन्य संबंधित संगठनों के साथ समन्वय कर विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने का आह्वान किया। उन्होंने बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपने कौशल को उन्नत करने तथा विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं भविष्योपयोगी कौशलों से जोड़ने पर बल दिया।
कौशल शिक्षा को व्यवहार, रोजगार और जीवन-कौशल से जोड़ना आवश्यक : प्रो. मेहरोत्रा
सौंदर्य एवं कल्याण क्षेत्र के क्षमता निर्माण कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. विनय स्वरूप मेहरोत्रा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा को केवल ज्ञान एवं प्रमाणपत्र तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशल विकसित करना आवश्यक है। तेजी से बदलती तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में कौशल शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ना होगा। वहीं, परिधान क्षेत्र के क्षमता निर्माण कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. पिंकी खन्ना ने देशभर में एक साथ आयोजित 12 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगभग 1,000 प्रतिभागियों की सहभागिता को महत्त्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों के लिए हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण, संबंधित उद्योगों के भ्रमण तथा अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षण के दौरान विषय से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान दिया जाएगा।



