कर्जदार मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार, नए साल में उधारी हुई रिकॉर्ड 9200 करोड़ पार
क्या खर्च नहीं निकाल पा रही मध्य प्रदेश सरकार?


भोपाल : मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से बड़ा कर्ज उठाने जा रही है. मई के आखिरी सप्ताह में सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए 2,800 करोड़ रुपए का नया ऋण ले रही है. इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लिया गया कुल कर्ज 9200 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा. खास बात यह है कि इस बार सरकार ने अप्रैल महीने से ही ऋण लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जबकि पहले आमतौर पर मई से कर्ज उठाया जाता था. ऐसे में विपक्ष भी लगातार प्रदेश की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज पर सवाल खड़े कर रहा है.
दो हिस्सों में मिलेगा 2800 करोड़ का ऋण
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार, सरकार यह कर्ज मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण के तहत बॉन्ड जारी कर आरबीआई के माध्यम से ले रही है. इसमें पहली किस्त 1600 करोड़ रुपए की होगी, जिस पर 7.64 प्रतिशत ब्याज देना होगा. वहीं, दूसरी किस्त 1200 करोड़ रुपए की होगी, जिसपर 7.83 प्रतिशत ब्याज दर तय की गई है. दोनों ऋणों का भुगतान छःमाही किस्तों में हर साल अप्रैल और अक्टूबर में किया जाएगा.
2034 से 2048 तक चुकाना होगा पूरा कर्ज
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार सरकार द्वारा लिया जा रहा 1600 करोड़ रु का पहला ऋण वर्ष 2034 तक की अवधि के लिए रहेगा. वहीं, दूसरा ऋण 1200 करोड़ रु का है, जिसकी अवधि साल 2048 तक यानी अगले 22 वर्षों के लिए लिया गया है. दोनों सिक्योरिटीज की नीलामी आरबीआई कराएगा और भुगतान प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी कर ली जाएगी.
क्या खर्च नहीं निकाल पा रही मध्य प्रदेश सरकार?
कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने कहा, ” इस वित्त वर्ष में सरकार ने अप्रैल से ही बाजार से पैसा उठाना शुरू कर दिया था. अप्रैल 2026 में दो चरणों में कुल 4600 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया. इसके बाद मई की शुरुआत में 1800 करोड़ रुपए का ऋण उठाया गया और अब 2800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया जा रहा है. इस तरह चालू वित्त वर्ष में कुल उधारी 9200 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. ऐसे में समझ आता है कि सरकार को खर्च निकालने के लिए कर्ज लेने के अलावा और कोई विकलप नहीं बचा है.”




