भोपाल मेट्रो: रोज करीब 5 लाख रुपये खर्च, महीनेभर में सिर्फ 5 लाख रुपये की आय
एम्स से सुभाष नगर के बीच 7 किलोमीटर चल रही मेट्रो

भोपाल: मेट्रो की शुरुआत को अब करीब एक साल भोपाल में होने वाला है। लेकिन अभी भी भोपाल मेट्रो के पास यात्रियों का टोटा है। मेट्रो ट्रेन को चलाने में एक सप्ताह में करीब 50 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। इसे रिकवर करने में 100 दिन का समय लग सकता है।एक साल बाद भी भोपाल मेट्रो को यात्री नहीं मिल रहे हैं। मेट्रो परिचालन में हर सप्ताह करीब 50 लाख रुपए खर्च होते हैं। अनुमानित यात्रियों की संख्या देखकर पता चलता है कि इसकी रिकवरी में 100 दिन का समय लग सकता है। कमाई बढ़ाने के लिए मेट्रो के अन्य तरीके भी सफल नहीं रहे हैं।
सलाना 20-25 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान
मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एस कृष्णा चैतन्य के अनुसार, सलाना परिचालन और रखरखाव का खर्च 20-25 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब है कि हर दिन साढ़े पांच से लगभग लाख रुपए का खर्च आएगा। सप्ताह के हिसाब से देखें तो 38 से 48 लाख रुपए तक जाएगा।
150-500 तक पहुंचती है यात्रियों की संख्या
वहीं, सामान्य दिनों में यात्रियों की अनुमानित संख्या 150 से 500 के बीच में होती है। वीकेंड पर यह संख्या 1500 तक जाती है। अगर औसत किराया 50 रुपए मान लिया जाए तो टिकट से होने वाली कमाई खर्च की तुलना में बहुत कम है। ये आंकड़े केवल एक अनुमान हैं, न कि ऑडिट किए राजस्व के आंकड़े हैं।
यात्रियों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं
भोपाल मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के जनसंपर्क अधिकारी ने यात्रियों की मौजूदा संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। जुलाई के बाद रोजाना होने वाली ट्रिप की संख्या 9 से बढ़कर लगभग 20 हो गई है। लेकिन यह डेटा उपलब्ध नहीं है कि यात्रियों की संख्या कितनी बढ़ी है। इन अतिरिक्त सेवाओं से यात्रियों की संख्या में कोई बढ़ोतरी हुई है।
कमाई के लिए अन्य तरीके अपनाए
कॉर्पोरेशन टिकट से होने वाली कमाई को बढ़ाने के लिए विज्ञापन, सेमी-गेमिंग राइट्स, कमर्शियल लीग, कोचिंग स्पेस और निजी कार्यक्रमों जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। बीते दिनों मेट्रो में किटी और बर्थडे पार्टी की बुकिंग शुरू हुई थी लेकिन परवान नहीं चढ़ा। नवंबर 2025 में 700 से अधिक एलिवेटेड लाइन पिलरों पर विज्ञापन के लिए जगह किराए पर देने हेतु एक टेंडर जारी किया गया था।




