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मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में बाघों का कुनबा बढ़ता जा रहा, चार साल से सेंचुरी और नेशनल पार्क के प्रस्ताव खा रहे धूल

भोपाल। इस बार की बाघों की गणना में इनकी संख्या 700 पार होने की संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञ बढ़ती संख्या को लेकर खुशी के साथ चिंता भी जताते हैं क्योंकि वर्तमान में प्रदेश में एक भी ऐसा कॉरिडोर नहीं है, जो बगैर मानवीय दखल के एक से दूसरे संरक्षित क्षेत्र को जोड़ता हो। प्रदेश में 7 कॉरिडोर है, लेकिन पिछले 15 साल में वन विभाग एक भी नया कॉरिडोर डेवलप नहीं कर पाया है।

क्षमता से दो गुने बाघ
वर्तमान में प्रदेश के संरक्षित क्षेत्रों में क्षमता से दो गुने बाघ हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की क्षमता 75 बाघ की है, पर 124 बाघ हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व की क्षमता 70 बाघ की है लेकिन यहां 108 बाघ हैं। वहीं, पेंच में 87 और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 47 से अधिक बाघ हैं। सिर्फ संजय दुबरी टाइगर रिजर्व सीधी ही ऐसा पार्क है, जहां बाघों की संख्या कम है। पार्क में वर्ष 2018 की गणना में छह बाघ पाए गए थे।

सिर्फ कूनो नेशनल पार्क का गठन किया
मप्र में 11 सेंचुरी और 3 नेशनल पार्क का प्रस्ताव चार साल से धूल खा रहा है। सरकार सिर्फ कूनो नेशनल पार्क का गठन किया। श्योपुर, बालाघाट, मंडला छिंदवाड़ा, शहडोल, डिंडोरी, सागर, खंडवा, जबलपुर, इंदौर, सिवनी और नर्मदापुरम में वाइल्ड लाइफ सेंचुरी बनाने की तैयारी थी। वहीं, रातापानी, मंदाता, ओंकारेश्वर में नेशनल पार्क बनाने का प्रस्ताव है।नौरादेही वन्य अभयारण्य में 2018 में एक बाघ और दो बाघिन को छोड़ा गया था। अब इनकी संख्या बढ़कर 12 हो चुकी है। अभी वहां 3 नर और 9 मादा बाघ हैं। 5 साल बाद माधव नेशनल पार्क में इस तरह बाघों की शिफ्टिंग की गई है।

sidhi: Sanjay Dubri Tiger Reserve buzzing with tigers

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