कालोनाइजरों को लुभाने घटाई अनुबंध पत्र की स्टाम्प-ड्यूटी

जबलपुर। शासन ने एक तरफ तो शासन ने चिन्हित क्षेत्रों की गाइडलाइन दरों में वृद्धि कर आम खरीददार पर बोझ बढ़ाने का निर्णय लिया है। दूसरी तरफ कालाेनाइजरों को फायदा पहुंचाने का रास्ता भी खोला है। शासन की ओर से विकास अनुबंध पत्र पर लगने वाली स्टाम्प ड्युटी को घटा दिया है। यह दरें आदेश जारी होने के साथ ही लागू भी कर दी गई हैं।
शासन शहरीकरण के लिए बड़े बिल्डरों और कालोनाइजरों को प्रोत्साहित करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। उसकी ओर से विकास अनुबंध पत्रों की स्टाम्प ड्युटी की दरों में कटौती करने का आदेश जारी किया गया है। यह कटौती साढ़े तीन प्रतिशत की बताई जा रही है। शासन की ओर से गाइडलाइन की दरों से संबंधित आदेश भले एक अप्रैल से प्रभावी हो रही हों, लेकिन कालोनाइजरों के लिए जारी आदेश तत्काल प्रभावशील कर दिए गए।
क्या होता है विकास अनुबंध पत्र
किसी कालोनाइजर द्वारा यदि किसी अन्य भूस्वामी की भूमि पर कालोनी विकसित करता है, तो उसको भूस्वामी के साथ अनुबंध करना होता है। इस अनुबंध को पंजीकृत कराने की एवज में पंजीयन विभाग रजिस्ट्री शुल्क वसूलता है। इसके बाद जारी अनुबंध पत्र को ही वैधानिक मान्यता होती है। ऐसा करना प्रत्येक कालोनाइजर के लिए आवश्यक होता है।
ये आए बदलाव
सत्र 2022-23 तक किसी कालोनी के डेवलपमेंट में यदि कुल लागत (भूमि की बाजार मूल्य से कीमत सहित) का 60 प्रतिशत कालोनाइजर व्यय करता है तो उसके हिस्से के व्यय का पांच प्रतिशत विकास अनुबंध पत्र के निष्पादन के लिए जमा कराया जाता था। इसे अब घटाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया गया है। इसी तरह से कालोनाइजर यदि अपनी खुद की भूमि पर कालोनी विकसित करता है तो उसे जमीन की कुल कीमत का .25 प्रतिशत शुल्क जमा कराना होगा।
इसी तरह से कालोनाइजर की ओर से डेवलप किए जा रहे भूभाग का 25 प्रतिशत प्रशासन के पास बंधक रहता है। इस पर लगने वाली स्टाम्प ड्युटी पहले बंधक भूभाग की कुल कीमत का .5 प्रतिशत ली जाती थी। इसे घटाकर अब .125 कर दिया गया है। ये आंकड़े देखने में भले बहुत छोटे लगें, लेकिन इनका असर लाखाें रुपयों में होगा।
शासन ने कालोनाजरों को राहत देने के लिए विकस अनुबंध पत्र के लिए शुल्क की दरों में कटौती की है। यह कटौली 75 प्रतिशत तक की गई है। जो शुल्क .5 प्रतिशत रहा उसे .125 प्रतिशत कर दिया गया है।
-डा. पीके अहिरवाल, वरि.जिला पंजी.


