आपके अच्छे विचार और कार्य देते खुशी

ग्वालियर। खुशी और सुकून यह हमारी सोच पर निर्भर करती है। इसलिए कहा भी जाता है कि खुशी आपके मन के विचार पर निर्भर करती है न कि बाहरी हालात पर। यह तो हमारी सोच , खान पान और शारीरिक सक्रियता और दिनचर्या तय करती है। 20 मार्च को अंतराष्ट्रीय डे आफ हैप्पीनेस दिवस है। जिसको लेकर शहर के उद्योगपति,डाक्टर, आईएएस ने नईदुनिया के साथ अपने दिल की बात की। जिसमें उन्होंने बताया कि खुशी अनमोल है। यह न तो भौतिक साधनों से मिलती है और न हीं इसके लिए कहीं जाने की जरुरत होती है। यह तो आपके मन के भीतर होती है जो एक छोटे से काम या बात पर भी बहुत मिलती है।
खुशी का सीधा संबंध दिल व दिमाग से है। जब मन प्रशन्न तो हर कार्य में खुशी मिलती है। आपकी प्रशन्नता आपके शरीर को स्वस्थ्य रखती है। क्योंकि खुशी के लिए शरीर में पाए जाने वाले रसायन भी जिम्मेदार होते हैं। इनकी सक्रियता आपकी मनोस्थिति पर निर्भर करती है। जब हम मुस्कराते हैं तो हमारे मस्तिष्क से एंडोर्फिन,डोपामाइन, और सेरोटोनिन नामक रसायन या न्यूरोट्रांसमीटर निकलता है। जो खुशी और आनंद की भावना के लिए जिम्मेदार होते है। यह रसायन तनाव के स्तर को कम करता है और सुकून को बढ़ावा देता है। जिसका हमारे शरीर व मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एरोबिक व्यायाम जैसे हल्की फुल्की वर्जिश,तैरना, नाचने से खुशी मिलती है। डा प्रियवंदा भसीन ने कहा कि उन्हें सितार की तान मुझे सुकून देती है। जब भी काम काज को लेकर तनाव या थकान होती है तो मैं कुछ पल अपने लिए निकाल ही लेती हूं। उन पल में मुझे दो काम ही सुकून देते हैं। पूजा पाठ के साथ ध्यान और दूसरा सितार पर तान। जब इन दोंनो को मैं आत्मसात करती हूं तो मुझे एक अजीब सा सुकून मिलता है।
मुझे स्लिम एरिया में काम करने में अधिक खुशी होती है। महिलाओं व बच्चों की ब्लड जांच कराना व उन्हें बेहतर उपचार दिलाना अच्छा लगता है। इसलिए अस्पताल से जब भी समय मिलता मैं इन क्षेत्रों में पहुंचकर उनका दर्द कम करने का प्रयास करती हूं। क्योंकि उनके चहरे की मुस्कान मुझे खुशी देती है। समाज सेवी जीडी लड्डा का कहना था कि एन्हें पेड़ पौधों को लगाने से लेकर संवारना और जरुरत मंद को भोजन खिलाना बेहद पसंद है। इससे मुझे एक अजीब खुशी मिलती है। भूखे व मजबूर और गरीब को भोजन खिलाकर जो सुकून मिलता है वह मुझे किसी काम में नहीं मिलता। इसलिए हर दिन सुबह भोजन के 400 पैकट घर से ही बांट देता हूं। इसी तरह कैंसर मरीजों के लि डेढ़ सौ पैकेट अस्पताल भेजता हूं। मुझे समाजिक कार्य करना अच्छा लगता है। इसलिए आमजन की परेशानियों को देखते हुए समर्पण लैब और भोजन का प्रकल्प शुरू किया। जो गरीब व आमजन की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और मुझे प्रशन्नता दे रहा है।


