इंदौर में एक मंच पर पं. प्रदीप मिश्रा और आचार्य अनुरुद्धाचार्य को देख गूंजा राधे कृष्ण

इंदौर। इंदौर के श्रमिक क्षेत्र के मां कनकेश्वरी गरबा परिसर में आयोजित सात दिनी भागवत कथा का अंतिम दिन श्रद्धालुओं के लिए खास बन गया। जब आचार्य पं. अनुरुद्धाचार्य महाराज के मुखारबिंद से हो रही भागवत कथा के मंच पर ख्यात कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा सीहोर वाले का आगमन हुआ। उनके आते ही पंडाल में मौजूद श्रद्धालु राधे-कृष्ण के जयघोष लगाने लगे। पं. मिश्रा ने इस दौरान व्यासपीठ का पूजन किया और आयोजन समिति की ओर से उनका शाल-श्रीफल से अभिनंदन किया गया।
इस मौके पर पं. मिश्रा ने कहा कि प्रत्येक घरों में बुजुर्गों का सम्मान-सत्कार अवश्य होना चाहिए। इससे पुण्य मिलता है। कथा श्रवण से ही समस्त जीवों का कल्याण हो जाता है। वृद्धों की सेवा करना अलौकिक है। हमें जीवन में बदलाव लाने के लिए अवश्य संकल्प लेना चाहिए। व्यक्ति का जीवन सार्थक होना आवश्यक है। जीवन में आनंद, सुख-समृद्धि हमेशा रहनी चाहिए। शिव महापुराण से लोगों को बल मिलाता है। हजारों भक्तों ने जयकारे लगाए।विधायक रमेश मेंदोला ने बताया कि भागवत कथा बेलेश्वर महादेव मंदिर बावड़ी हादसे में दिवंगत हुए लोगों की स्मृति में की गई थी।
जीवन में भक्ति मार्ग सबसे श्रेष्ठ
आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने कृष्ण-सुदामा मिलन प्रसंग की कथा कही। उन्होंने कहा कि जीवन में भक्ति मार्ग सबसे श्रेष्ठ है। प्रत्येक मनुष्य भक्ति के मार्ग पर प्रभु को प्राप्त कर सकता है। जीवन में सफलता चाहिए तो पहले अपनी बुराइयों को ख़त्म करें। भगवान की हर लीला में एक संदेश है। अगर कोई व्यक्ति ऊंचे पद पर प्रतिष्ठित हो जाता है तो बिल्कुल भी अहंकार नहीं करना चाहिए। सरल-सहज स्वभाव रखकर कार्य करें। आयोजन में भाजपा नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, आईडीए उपाध्यक्ष गोलू शुक्ला, एमआईसी सदस्य जीतू यादव, चंदू शिंदे आदि मौजूद थे।


